आज आप पड़ेंगे। हिंदी नाटक का विकास और हिंदी में नाटक के कितने युग और कोन–कोन से युग रहे।
• नाटक शब्द की व्युत्पक्ति ‘नट’ धातु से हुई है, जिसका अर्थ ‘सात्विक भावो का प्रदर्शन’ है। नट (अभिनय करने वाला) से अभिनीत होने के कारण भी यह ‘नाटक’ कहलाता है।
• नाटक एक दृश्य–काव्य है। जिसमे श्रव्य काव्य होने के गुण भी विद्यमान हैं।
• जिस नाटक के व्यंग्य तथा सुरुचिपूर्ण हास्य का पुट देकर सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक समस्याओं को उदघाटित किया जाता है, वह ‘प्रहसन’ या ‘प्रहसनात्मक’ नाटक है।
हिंदी नाटक की विकास परम्परा
(i) भारतेन्दु युग
(ii) व्दिवेदी युग
(iii) प्रसाद युग
(iv) प्रसादोत्तर युग
(v) समकालीन युग
भारतेन्दु युग के प्रमुख नाटक
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र — विद्या सुन्दर, चन्द्रावली
श्रीनिवास दास — तप्ता संवरण, प्रह्लाद चरित्र
अयोध्या सिंह उपाध्याय — प्रद्युम्न विजय
शालिग्राम लाल — अभिमन्यु वध
सीताराम वर्मा — विवाह विडम्बन
काशीनाथ खत्री — विधवा–विवाह
राजा लक्ष्मण सिंह — शकुन्तला (अनूदित)
व्दिवेदी युग के प्रमुख नाटक
कृष्ण प्रकाश सिंह — पन्ना
बद्रीनाथ भट्ट — चंद्रगुप्त
हरिदास माणिक — संयोगिता हरण
जीवानन्द शर्मा — भारत विजय
बनवारी लाल — कृष्ण कथा, कंस वध
माखनलाल चतुर्वेदी — कृष्णार्जुन–युद्ध
रामगुलाम लाल — धनुष यज्ञ लीला
प्रसाद युग के प्रमुख नाटक
जयशंकर प्रसाद — सज्जन, विशाख, अजातशत्रु
हरिकृष्ण प्रेमी — रक्षाबंधन, पाताल विजय, प्रतिशोध
प्रेमचन्द — कर्बला, संग्राम
पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ — महात्मा ईसा, चम्बन, डिक्टेटर
रामवृक्ष बेनीपुरी — अंबपाली
सुदर्शन — अंजना
विश्वम्भर नाथ शर्मा ‘कौशिक’ — हिंदू विधवा नाटक
उदय शंकर भट्ट — कमला
रामनरेश त्रिपाठी — सुभद्रा
मैथिलीशरण गुप्त — तिल्लोतमा
लक्ष्मीनारायण मिश्र — अशोक, राजयोग, सिन्दूर की होली,
आधीरात
विष्णु प्रभाकर — युगे युगे क्रान्ति
प्रसादोत्तार युग के प्रमुख नाटक
उदयशंकर भट्ट — राधा, अश्वत्थामा, असुर, सुन्दरी,
मुक्तिपथ
पाण्डेय बेचन शर्मा — गंगा का बेटा
हरिकृष्ण प्रेमी — आहुति, प्रकाश स्तम्भ, अमृत पुत्री
वृंदावन लाल वर्मा — कश्मीर का काटा, झांसी की रानी
गोविन्द वल्लभ पंत — ययाति
सेठ गोविन्द दास — कर्ण
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समकालीन नाटक
मोहन राकेश — आधे अधूरे, शायद, आषाढ़ का एक दिन
भीष्म साहनी — हानूश, माधवी, आलमगीर, रंग दे बसंती चोला
जगदीश चन्द्रमाथुर — कोणार्क, पहला राजा, दशरथनंदन
लक्ष्मीनारायण लाल — दर्पण, सूर्यमुख, गुरु, कजरीवन, गंगामाटी
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